कभी कभी सोचता हूँ क्या है ये जिन्दगी,
कभी हकीकत तो कभी एक सपना
कभी सच सी तो कभी झूठ सी है ये जिन्दगी
कभी कभी.................
कभी रुलाये तो हँसाये ये जिन्दगी
कभी लगे तन्हा सी तो कभी लगे भरी भरी
कभी लगे अपनी तो कभी परायी सी ये जिन्दगी
कभी कभी...........
कभी दे गम तो कभी दे खुशी ये जिन्दगी
कभी दिखाये अनेक सपने तो कभी तोडे़
कभी समेटे खुशियां अपने आगंन मे तो
कभी पखं पसारे ये जिन्दगी
कभी कभी...........
कभी लगता एक पहेली सी है सुलजती नही
पर फ़िर भी एक सहेली सी है ये जिन्दगी
कभी लगता है मुस्कराती कभी अकेली सी
कभी धूप तो कभी छाऊँ सी ये जिन्दगी,,,
अभी तक समझ नहीं पाया क्या है ये जिन्दगी
समझना है इसको कठिन फ़िर भी कोशिस करता हूँ.
क्या है ये जिन्दगी बस यही सोचता हूँ
कभी कभी सोचता हूँ क्या है ये जिन्दगी...!!
!!!*धन्यवाद*!!!
****~!~* देव *~!~****
!!!!जय हिन्द!!!!
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C@Dev Negi (देव नेगी)
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